रेंकी की
विशेषताएं
1 हमारा सूक्ष्म शरीर चेतना आकाश तत्व
(ब्रमांड) में विचरण करता हैं। और स्थूल शरीर पृथ्वी पर और इन दोनों के मिलन से ही
जीवन की प्राप्ति होती हैं। जब इन का संतुलन बना रहता हैं। तो हम निरोगी रहते हैं।
जब किसी एक का संतुलन बिगड़ता हैं। तो दूसरा भी बिगड़ने लगता हैं। और हम रोगी हो
जाते हैं।
जेसे हमारे मन में चिंता, ओर तनाव बढ़
गया, हम डिप्रेसन में आ गये तो स्थूल शरीर बिगड़ने लगेगा। सूक्ष्म शरीर हमारी
भावना ओर विचारो पर निर्भर करता हैं। स्थूल शरीर हमारे खान पान वे दिनचर्या पर निर्भर करता हैं। अत:
हमें अपने भाव और विचारों के साथ साथ अपनी दिनचर्या में खानपान पर भी ध्यान देना
होगा। हमारे विचार और भौतिक शरीर जितना
ज्यादा स्वस्थ होगा ब्रह्मांडीय ऊर्जा उतनी ज्यादा हम ले या दे पाएंगे। इसलिए हमें
खानपान, दिनचर्या व अपने विचारों पर ध्यान देना होगा, जिससे अधिक ऊर्जा को आप
अवशोषित कर, प्रयोग कर सकें।
2 रोगी मानसिक हो या शारीरिक वह
हमारे प्रभामंडल में नकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि कर देता हैं। और रेंकी इस
नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मकता में बदल देती हैं। जिससे रोगी का रोग ठीक हो जाता हैं।
3 रेंकी हाथों के द्वारा हमारे
आभामंडल को, सूक्ष्म शरीर को व भौतिक शरीर को ऊर्जावान बना देती हैं। और हम पूर्ण
स्वास्थ्य को प्राप्त करते हैं।
4 विज्ञान के अनुसार समस्त सृष्टि सूक्ष्मतर
तरंगों का ही स्थूल रूप हैं। और जब इस सृष्टि के किसी भी द्रव्य का विघटन होता हैं।
तो वह द्रव, द्रव से वायु, वायु से सूक्ष्मतर
कणों में विभाजित होते होते तरंगों में
बदल जाता हैं। योग विज्ञान के अनुसार स्थूल शरीर दिखाई देता हैं। इससे लगा सूक्ष्म
शरीर हैं। और सूक्ष्म से सूक्ष्मतर कारण शरीर हैं। रेंकी के द्वारा सूक्ष्मतर कारण
शरीर को ऊर्जा दी जाती हैं, ओर धीरे-धीरे सूक्ष्म शरीर से होती हुई स्थूल शरीर में
पहुंचकर पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करती हैं।
इसी प्रकार हमारी प्रत्येक जरूरत, इच्छा,
संबंध, भाव, (डर आदि) भी एक सूक्ष्मतर तरंगों के रूप में इस ब्रम्हांड में
विद्यमान होते हैं रेंकी आपकी सभी जरूरतों को और इच्छाओं के अनुरूप तरंगों को आपकी
ओर आकर्षित करती हैं। जिससे हमें मनवांछित फल मिल जाता हैं।
5 रेंकी धर्म, जाति,
वर्ण, पंत आदि के बिना भेदभाव के सभी संजीव, निर्जीव, भौतिक, पराभोतिक, पेड़-पौधे,
जंतु, जानवर, व जिवित व मृत आदि को समान रुप से लाभ पहुंचाती हैं।
6 रेंकी कभी भी किसी भी
परिस्थिति में ले सकते हैं क्योंकि रेंकी एक
ऊर्जा हैं। और प्रत्येक को हर क्षण ऊर्जा की जरूरत होती ही हैं।
7 रेंकी लेने या देने
वाले के लिए कोई समय का, खाने-पीने का आदि बंधन नहीं हैं। कि आपको यह करना हैं। यह
नहीं करना हैं। 8 रेंकी किसी भी समय (दिन-रात) 24 घंटे आपको
प्रत्येक स्थान पर सरल सुलभ होती हैं। और इसकी कोई समय सीमा भी नहीं होती हैं।
रोगी के अनुरूप 15 से 60 मिनट तक रेंकी दे सकते हैं। हमारी कल्पांत
रेंकी प्रत्येक बिंदु पर 10 से 15 सेकेंड
ही देनी होती हैं। परंतु ज्यादा देने से भी कोई साइड इफेक्ट नहीं होता
9 रेंकी केवल आपकी आस्था और विश्वास
से कार्य करती हैं। लेने वाले में और देने वाले में जितना अधिक विश्वास होगा रेंकी
से उतना ही ज्यादा लाभ हो पाएगा
10 यह आप की
अंतर्दृष्टि और ज्ञान को बढ़ाकर आप का ब्रमांड से संबंध स्थापित करती हैं। और
क्योंकि इसे प्रेम करुणा से प्रार्थना कर के लाभ के लिए आमंत्रित किया जाता हैं।
इसलिए किसी को बिना नुकसान पहुंचाए यह काम करती हैं। और आपके अंदर दया, प्रेम, करुणा,
क्षमा, आनंद, का संचार करती हैं।
Kalpant Healing Center
Dr J.P Verma (Swami Jagteswer Anand
Ji)
(Md-Acu, BPT, C.Y.Ed, Reiki Grand
Master, NDDY & Md Spiritual Healing)
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