स्वास्थ्य
पहला सुख निरोगी
काया।, दूजा सुख घर होवै माया॥
तीजा सुख कुलवन्ती
नारी।, चौथा सुख सुत आज्ञाकारी॥
पंचम सुख भाई
बलवीरा।, छठा सुख हो राज में सीरा॥
सप्तम सुख स्वदेश
में वासा।, अष्टम सुख हों पंडित पासा॥
नौवां सुख हों मित्र
घनेरे।, ऐसे नर नहिं जग बहुतेरे॥
स्वस्थ रहना सबसे बड़ा सुख
कहा है। कहावत भी है- 'पहला सुख निरोगी काया'। कोई आदमी तभी अपने जीवन का पूरा आनन्द उठा सकता है, जब वह शारीरिक और
मानसिक रूप से स्वस्थ रहे। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है।
इसलिए मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी शारीरिक स्वास्थ्य अनिवार्य है। ऋषियों ने कहा
है 'शरीरमाद्यं खलु
धर्मसाधनम्' अर्थात् यह शरीर ही धर्म का श्रेष्ठ साधन है। यदि हम धर्म में विश्वास रखते हैं और
स्वयं को धार्मिक कहते हैं, तो अपने शरीर को स्वस्थ रखना हमारा पहला कर्तव्य है। यदि शरीर स्वस्थ नहीं है, तो जीवन भारस्वरूप
हो जाता है। यजुर्वेद में निरन्तर कर्मरत रहते हुए सौ वर्ष
तक जीने का आदेश दिया गया है-
(कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेत्छतं समाः)
“अर्थात् हे मनुष्य इस संसार
में कर्म करते हुए सौ वर्ष तक जीने की इच्छा कर”
वेदों में ईश्वर से प्रार्थना की गई है-
“पश्येम् शरदः शतम्, जीवेम् शरदः शतम्,श्रुणुयाम् शरदः शतम्, प्रब्रवाम् शरदः शतम्, अदीनः स्याम् शरदः शतम्, भूयश्च शरदः शतात्”
अर्थात् “हम सौ वर्ष तक देखें, जिएं, सुनें, बोलें और आत्मनिर्भर
रहें। ईश्वर की कृपा से) हम सौ वर्ष से अधिक भी वैसे ही रहें।”
एक विदेशी विद्वान् डॉ. बेनेडिक्ट जस्ट ने कहा है- “उत्तम स्वास्थ्य वह अनमोल रत्न है, जिसका मूल्य तब
ज्ञात होता है, जब वह खो जाता है।”
एक शायर के शब्दों में- “कद्रे-सेहत मरीज से पूछो, तन्दुरुस्ती... हजार नियामत है।”
प्रश्न उठता है कि स्वास्थ्य क्या है अर्थात् किस व्यक्ति को हम स्वस्थ कह सकते हैं? साधारण रूप से यह
माना जाता है कि किसी प्रकार का शारीरिक और मानसिक रोग न होना ही स्वास्थ्य है।
परन्तु स्वास्थ्य सिर्फ बीमारियों
की अनुपस्थिति का नाम नहीं है। हमें संपूर्ण स्वास्थ्य के बारे में अवश्य जानकारी
होनी चाहिए। स्वास्थ्य का अर्थ विभिन्न लोगों के लिए अलग-अलग होता है। अपने आपको स्वस्थ कहने का यह अर्थ होता है कि हम अपने जीवन में
आने वाली सभी सामाजिक, शारीरिक और भावनात्मक चुनौतियों का प्रबंधन करने में सफलता पूर्वक सक्षम है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, स्वास्थ्य सिर्फ रोग या दुर्बलता की अनुपस्थिति
ही नहीं बल्कि वास्तव में, अच्छे स्वास्थ्य की कल्पना समग्र स्वास्थ्य का
नाम है जिसमें शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, बौद्धिक स्वास्थ्य, आध्यात्मिक स्वास्थ्य और सामाजिक स्वास्थ्य भी शामिल है।
प्रचलित चिकित्सा पद्धतियों में स्वास्थ्य की कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं दी गई है। ऐलोपैथी और होम्योपैथी के चिकित्सक किसी भी प्रकार के रोग के अभाव को ही स्वास्थ्य मानते हैं। वे रोग को या उसके अभाव को तो माप सकते हैं, परन्तु स्वास्थ्य को मापने का उनके पास कोई पैमाना नहीं है। रोग के अभाव को मापने के लिए उन्होंने कुछ पैमाने बना रखे हैं, जैसे हृदय की धड़कन, रक्तचाप, लम्बाई या उम्र के अनुसार वजन, खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा आदि। इनमें से एक भी बात अनुभव द्वारा निर्धारित सीमाओं से कम या अधिक होने पर वे व्यक्ति को रोगी घोषित कर देते हैं और अपने हिसाब से उसकी चिकित्सा भी शुरू कर देते हैं।
Kalpant Healing Center
Dr J.P Verma (Swami Jagteswer
Anand Ji)
(Md-Acu, BPT, C.Y.Ed, Reiki Grand
Master, NDDY & Md Spiritual Healing)
Physiotherapy, Acupressure, Naturopathy, Yoga, Pranayam, Meditation, Reiki, Spiritual & Cosmic Healing, (Treatment & Training Center)
C53, Sector 15 Vasundra,
Avash Vikash Markit, Near Pani Ki Tanki,
Ghaziabad
Mob-: 9958502499
No comments:
Post a Comment