जीवनीशक्ति का ह्रास-: हमारे स्वास्थ्य का आधार है – जीवनी शक्ति (वाईटल एनर्जी)। यदि हमारी जीवनी शक्ति ठीक है तो हम रोगमुक्त रह सकते हैं। अगर जीवनी शक्ति दुर्बल है तो रोगों का आक्रमण होता है और जीवनी शक्ति नष्ट होने से मृत्यु आ जाती है।
जीवनी शक्ति के तीन प्रमुख कार्य हैं-
शरीर का पोषण, निर्माण एवं विकास करना।
विजातीय द्रव्यों को बाहर निकालना।
शरीर की मरम्मत करना।
शरीर में उत्पन्न होने वाले मल-मूत्र, पसीना, कफ आदि का पूर्ण विकास न होने पर, उन विजातीय पदार्थों के शरीर में ही जमा रहने पर रोग उत्पन्न होते हैं।इन विजातीय पदार्थों के रक्त में मिलने से बुखार, हृदयरोग एवं चर्मरोग उत्पन्न होते हैं। आँतों में जमाहोने पर कब्ज, गैस, दस्त-पेचिश, बवासीर, भगंदर, हर्निया एवं एपेण्डीसाईटीस को जन्म देते हैं। मस्तिष्क पर उनका प्रभाव पड़ने पर सिरदर्द, अनिद्रा, मिर्गी व पागलपन आदि उत्पन्न होते हैं। गुर्दों में प्रभाव पड़ने से पथरी आदि की सम्भावना बढ़ जाती है। फेफड़ों में उन विजातीय पदार्थों के जमा होने पर सर्दी, खाँसी, दमा, न्यूमोनिया, क्षय एवं कैंसर की सम्भावना रहती है।
मानसिक तनाव, चिंता, क्रोध, दुःख, आवेश, भावुकता तथा अधीरता आदि के कारण हृदय, मस्तिष्क एवं स्नायु के रोग होते हैं।
जीवनी शक्ति दुर्बल होने के मुख्य कारण हैं-
>सामर्थ्य से अधिक शारीरिक तथा मानसिक कार्य करना एवं आवश्यक विश्राम न लेना जीवनीशक्ति का ह्रास करता है।
>रात्रि में काम करना व दिन में सोना जीवनीशक्ति का ह्रास करता है।
>आज दिन भर काम ओर रात को भय, चिंता, क्रोध आदि के कारण शरीर व मन को तनाव में रखना जीवनीशक्ति का ह्रास करता है।
>पौष्टिक आहार का अभाव या आवश्यकता से अधिक खाना। नशीली वस्तुओं एवं गलत आहार का सेवन। रात्रि को देर से भोजन करना व दिन को भोजन करके सोना जीवनीशक्ति का ह्रास करता है।
>उपवास की महत्ता न समझने से भी जीवनी शक्ति का ह्रास होता है। भविष्य में कभी भी किसी प्रकार की पीड़ा का अनुभव करें तो उपवास करें अथवा रसाहार या फलाहार पर रह कर, जीवनी शक्ति को पाचन कार्य में कम व्यस्त रखकर शरीर की शुद्धि तथा मरम्मत के लिए अवसर देंगे तो तुरंत स्वास्थ्य लाभ होगा।
>वीर्यरक्षा (ब्रह्मचर्य) की उपेक्षा करना जीवनीशक्ति का ह्रास करता है।
>विषैली औषधियों, इंजेक्शनों का प्रयोग तथा ऑपरेशन कराना एवं प्रकृति के स्वास्थ्यवर्धक तत्त्वों से अपने को दूर रखना जीवनीशक्ति का ह्रास करता है।
>स्नायु तंत्र की थकान के कारण भी जीवनीशक्ति का ह्रास होता है।
>नकारात्मक विचार हमारी जीवनीशक्ति का ह्रास करते है।
जीवनी शक्ति को बड़ाने के उपाए-: अगर जीवनी शक्ति मजबूत है तो रोग आयेंगे ही नहीं और अगर आयें भी, तो टिकेंगे नहीं।
>जीवनी शक्ति को बड़ाने का निशुल्क व सबसे बढ़िया तरीका योग व प्राणायाम है। इससे जीवनीशक्ति तेजी से बढ़ती है। प्राणायाम करने से मनोबल भी बढ़ता है और बुद्धिबल भी बढ़ता है। बहुत से ऐसे रोग होते हैं जिनमें कसरत करना संभव नहीं होता लेकिन प्राणायाम किये जा सकते हैं।प्राणायाम करने से एक विशेष फायदा यह होता है कि हमारे रोमकूप खुलने लगते हैं। हमारे फेफड़ो में कई हजार रोम छिद्र हैं। उनमें से किसी मनुष्य के 200, किसी के 300 तो किसी-किसी के 500 छिद्र काम करते हैं शेष सब छिद्र बंद पड़े रहते हैं। प्राणायाम से ये बंद छिद्र खुल जाते हैं।जो लोग प्राणायाम नहीं करते उनके ये छिद्र बंद ही पड़े रहते हैं। इससेउनकी प्राणशक्ति कमजोर हो जाती है और उन बंद छिद्रों में जीवाणु उत्पन्न होते हैं। ज्यों ही रोगप्रतिकारक शक्ति कम होती है वे जीवाणु दमा, टीबी आदि बीमारियों का रूप ले लेते है।प्राणायाम से रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है और इस शक्ति से भी कई जीवाणु मर जाते हैं। प्राणायाम करने से विजातीय द्रव्य नष्ट हो जाते हैं और सजातीय द्रव्य बढ़ते हैं। इससे भी कई रोगों से बचाव हो जाता है।
>सूर्य की किरणों में भी रोगप्रतिकारक शक्ति होती है। व जीवनीशक्ति को बढ़ावा मिलता है। सुवह की धुप में 30 मिनट प्रतिदिन टहलना से जीवनीशक्ति भरपूर मात्रा में बनी रहेती है।सूर्य की किरणों में बैठकर 10 मिनट प्राणायाम करें और शवासन में लेट जायें। जहाँ रोग है वहाँ हाथ घुमाकर रोग को मिटाने का संकल्प करें। इससे बड़ा लाभ होता है।
>मंत्रजाप भी जीवनी शक्ति को बढ़ाता है।-: तुलसी के पत्तों का सेवन तथा मंत्रजाप – ये रोगप्रतिकारक शक्ति को बढ़ाते हैं, मन को प्रफुल्लित रखते हैं और बुद्धि को तेजस्वी बनाने में सहायक होते हैं। तथा जीवनीशक्ति को बनाये रखते है।
>A.B.C जूस-: A आमला (Amla), B चकुन्दर (Beet) C गाजर (carrot) का जूस जीवनीशक्ति को मजबूत करता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, आयरन, विटामिन C,A, फास्फोरस, केल्शियम, सभी खनिज तत्व शरीर को मिल जाते है। इस जूस में 1 kg गाजर, 500 ग्राम चकुन्दर, व 250 ग्राम आमला लिया जाता है। यह जूस जीवनीशक्ति को बड़ाने का अच्छा स्रोत्र है।
>संतुलित आहार-: ऐसा आहार जो शरीर को पोषण दे, सभी विटामिन, खनिजो, लवणों, व जरुरी तत्वों की पूर्ति करता हो वो जीवनीशक्ति को बढ़ाता है। सभी अंकुरित अनाज व दाल में पोषक तत्व की मात्रा बढ़ जाती है ओर जीवनी शक्ति को प्रबल करते है।
> जहाँ नकारात्मक विचार हमारी जीवनीशक्ति का ह्रास करते है। वही सकारात्मक विचार हमारी जीवनीशक्ति को प्रबल करते है।
इस प्रकार हम प्राकर्तिक जीवन अपनाकर अपनी जीवनी शक्ति को बढ़ा सकते है।
हमारे शारीर में 12 जगहो पर जीवनीशक्ति का राज्य होता हैं।हर दो घंटे में एक एक अंग मे विशेष प्रभाव होता है।अगर ये बात जानकर फायदा उठाये तो आप भी दीर्घजीवी रहोगे और आपके द्वारा बड़े-बड़े काम हो सकते है। 24 घंटे हमारी जीवनीशक्ति बारह केन्द्रों में 2-2 घंटे विचलन करती है।
1. सुबह 3 से 5 हमारी जीवनीशक्ति फेफड़ो में होती है।उस समय 3 से 5 के अंदर अगर आप प्राणायाम कर लेते है, तो आपकी रोगप्रतिकारक शक्ति, अनुमान शक्ति, शौर्यशक्ति विकसित होगी।जिनको दमे की बीमारी हो, टी. बी. की बीमारी हो उनको तो खासकर इस टाईम में प्राणायम करना चाहिए। जिसके दवाई खा-खाकर लंग्स कमजोर हो गए।वो इस समय का प्रयोग करें,क्योकि इस समय फेफडो की राजसत्ता होती है।
2. सुबह 5 से 7 आपकी जीवनीशक्ति बड़ी आंत में होती है 5 से 7 के बीच आप 2 गिलास गुनगुना पानी पी लिया करे, पानी ज्यादा ठंडा या ज्यादा गरम नहीं होना चहिये। अगर तांबे के बर्तन में रात का रखा पानी पिया जाये तो ओर अधिक लाभ होता है। पानी पीकर थोड़ा टहलना चहिये या एक जगह खड़े होकर दोड़े या जंप-बंप मारे फिर शौच जाये, 7 बजे के बाद शोच जाने की आदत से पेट ख़राब रहेता है।उसके पेट की गड़बड़ी बनी रहती है।ओर कितना भी उपाय इलाज करोगे लेकिन पेट की गड़बड़ी ठीक नहीं होंगी। तो 5 से 7 बजे के बीच बड़े आंत में जीवनीशक्ति होती है। उस समय तक योग, व्यायाम, घुमना आदि निपट ले।
3.7 से 9 जीवनीशक्ति आमाशय में होती है।आमाशय में बड़ी आंत की सफाई करने की ताकत होती है।तथा भोजन, पाचन आदि आसानी से होता है, 7 से 9 के बीच आपको हल्का-फुल्का पेय पदार्थ लेना चहिये, इससे सैंकडों पाचन रोगों से बचाव होगा।
4. 9 से 11 आपकी जीवनीशक्ति प्लीहा अग्नाशय में होती है, इसे जठरा भीकहेते है।उस समय पाचक रस ज्यादा बनता है।पाचन में मदत मिलती है, पाचन ठीक नहीं हुआ तो कच्चा रस बनता है।फिर शरीर मोटा, कमर में दर्द, थकान, आलस्य, अकारण शरीर में कुछ ना कुछ गड़बड़ी होती है।क्योकि 9 से 11 आपकी जीवनीशक्ति प्लीहा अग्नाशय में होती है।उस समय पाचन रस ज्यादा बनने से 9 से 11 के बीच भोजन कर लेना चहिये।डायबीटीज वालो को तो खास उस समय भोजन करना चाहिए और जिनका पाचन कमजोर है, उनको भी भोजन कर लेना चाहिए।कमजोर पाचन को तेज करना हो तो 3-5 खजूर रात को भिगा दे, ओर मसलके दूध में सुबह-सुबह पी ले,7 से 9बजे तक तो आँतो को शक्ति मिलेगी व आँतो का रस भी ज्यादा बनेने लगेगा।पाचन ज्यादा होगा और भोजन के साथ एक ग्लास गुनगुना पानी बीच-बीच में दो-दो घूँट पीते जाये।भोजन के बीच कई बार गर्म पानी पीने से भोजन सुपाच्च्य हो जायेगा।ध्यान रहे9 से 11 के बीच भोजन कर लेना चाहिए और डायबीटीज व कमजोर पाचन वाले को तो जरूर करना चहिये।
5. 11 से 1 में जीवनीशक्ति ह्रदय में रहती है।अगर उससमय भोजन करोगे तो मानवी संवेंद्नाएँ, स्नेह, प्रसन्नता आदि का गला घुट जायेगा। ओर11 से 1 के बीच भोजन करेंगे तो भोजन के रसो में, स्वादों में और भोजन के पाचन में ह्रदय उलझेगा।ह्रदय का विकास रुक जायेगा, आदमी निर्दयी हो जायेगा, स्वार्थी हो जायेगा, तनाव और टेंशनवाला हो जायेगा।इसलिये 11 से 1 के बीच भूलकर भी भोजन नहीं करना चाहिए।11 से 1 ह्रदय के विकास की सत्ता है, ह्रदय विकसित है, इस समय सत्संग, समाजसेवा,सतकर्म, सतभाव, भावग्राही कार्य करने चाहिये।
6. 1 से 3 जीवनीशक्ति छोटे आँत में होती है।उसका मुख्यकार्य है जो भोजन 11 बजे तक खाया गया उससे जो रस बना उससे पोषक तत्वों को अपने अन्दर खींचनावपुरे शरीर को देना।इसलिये अगर1 से 3 में भोजन खाया तो पोषक तत्व कहाँ मिलेंगे।जैसे कच्ची रोटी, कच्चा चावल, कच्ची दाल अच्छा नहीं लगता।ऐसे ही पोषक तत्वों की जगह पर बीमारी करने वाले कच्चे रस होते है, कई बीमारीयां इसी कारण होती है।
7.3 से 5 जीवनी शक्ति मूत्राशय में रहती है।उस समय अधिक पानी पीनेसे पत्थरी की बीमारी नहीं होगी वडायबीटीज की बीमारी जल्दी नहीं होगी और बुढ़ापे में पेशाब सबंधी जो तकलीफे होती है, वो सब नहीं होगी। जिनको भी पथरी है भूलकर भी ऑपरेशन नहीं करवाना चाहिये,चाहे पेशाब की जगह, किडनी की जगह, लीवर की जगह पत्थरी हो, कोई ऑपरेशन की जरूरत नहीं।पथ्थर चटा पौधेके दो-दो पत्ते सुबह-शाम खाये थोड़े दिन में पत्थरी खत्म हो जायेगी।1 से 3 छोटी आंत में 3 से 5 मूत्राशय में जीवनीशक्ति होती हैं।उस समय पानी पी लेना चाहिए और पानी पी के तुरंत बाथरूम नहीं जाना चहिये व बाथरूम जा के तुरंत पानी नहीं पीना चाहिए। कम से कम 10 मिनट का अंतर होना जरूरी है।
8. 5 से 7 जीवनीशक्ति गुर्दे में होती है।शाम का भोजन अगर 5 से 7 के अंदर कर लेते हो तो किडनी औरकान की तकलीफ कभी नहीं होंगी।
9. 7 से 9 के बीच जीवनीशक्ति मष्तिष्क में रहती है।उस समय धार्मिक लोग शास्त्र पढ़े, पाठ, श्लोक, गीता, रामायण, उपनिषद, कंठस्त, आसनी से करेंगे और बच्चों को कम मेहनत में याद रह जायेगा।7 से 9 के बीच स्पेशल ट्यूशन की जरुरत नहीं होती।परिवार वाले उनको थोडा पढ़ा लेंगे हो जायेगा।क्योकि7 से 9 जीवनीशक्ति मस्तक में रहती हैं। इसलियेमस्तक संबंधी काम ईसी समय कर लेना चाहिये।
10.9 से 11 जीवनीशक्ति मेरुरज्जु में रहती है, उस समय की नींद पूर्ण आराम देती है वथकान मिटाती है।
11. 11 से 1 में जीवनीशक्ति पित्ताशय में होती है।पित्त का संचय मानसिक नियंत्रण करता है।अगर 11 से 1के बीच टी.वी. देखा जायेगा तो चिडचिडापन हो जायेगा।पित्त सबंधी रोग होगे।पित्त और वायु मिलके हार्टअटक बनता है, नेत्र सबंधी रोग होंगे, आँख जलेंगे, अधिक मासिक आयेगा, कई बार हो जायेगा, ये सब बीमारी होगी।
12. अगर 1 से 3 के बीच कोई जगता है रात में तो उस समय जीवनीशक्ति लीवर में रहती है।लीवर शरीर का खास अंग है।
1 से 3 जागोगे तो बड़ा घाटा है उस समय शरीर को पूरा विश्राम मिलता है वनिद्रा गहरी होती है। शरीर को नई कौशिका बनाने का अवसर मिलाता है।अगर नई कौशिका नहीं बनी तो शरीर क्षीण होने लगेगा। और अगर इस समय पति-पत्नी का सेक्स हुआ तो जो कौशिका हैं वो भी कम हो जायेगी और बुढापा जल्दी आयेगा।
विशेष-: 11 से 1 जागोगे तो मानसिक विक्षेप हो जाएगा और 1 से 3 पति पत्नी का व्यवहार करना बहूत घाटा है। जैसे आमवस्या, पूर्णिमा को पति-पत्नी का संभोग का काम करनेवाले को विकलांग संतान ही पैदा होगी।अगर गर्भाधान नहीं हुआ तभी भी अमावस्या और पूनम को जीवनीशक्ति का ह्रास ज्यादा होने से कोई न कोई बीमारी पकड लेती है। तो 1 से 3 भूलकर भी संसार व्यवहार नहीं करना चाहिये।
शिवरात्री पर ग्रह-नक्षत्रों का ऐसा योग बनता है की इस समय ऊर्जा चरम पर होती है।इस समय शिवरात्री को अगर आपने उपवास किया है तो हमारी जीवनीशक्ति ऊर्जा और प्राण ऊर्ध्वगामी होते है। शिवरात्री के दिन भगवान शिव का बीज मंत्र ‘ॐ बम बम बम’ अगर सवा लाख जप करते है, तो गठियां की बीमारी से बिस्तर पे पड़ा मरीज एक दिन में दौड़ने लग जायेगा।इसी प्रकार
शिवरात्री की रात ‘ॐकार’ मंत्र का जप बच्चो से कराने सेबच्चे अच्छे बनेंगे, मार्क तो अच्छे लायेंगे साथ ही साथ उनकी मस्तिष्क की क्षमता भी बहूत ऊँची हो जाएगी।इसी प्रकार कुछ विशेष समय पर ऊर्जा का प्रभाव अधिक होता है उस समय पर कोई भी मन्त्र करने से आपकी जीवनी शक्ति बढकर बहुत से चमत्कार कर सकती है।
जीवनी शक्ति के तीन प्रमुख कार्य हैं-
शरीर का पोषण, निर्माण एवं विकास करना।
विजातीय द्रव्यों को बाहर निकालना।
शरीर की मरम्मत करना।
शरीर में उत्पन्न होने वाले मल-मूत्र, पसीना, कफ आदि का पूर्ण विकास न होने पर, उन विजातीय पदार्थों के शरीर में ही जमा रहने पर रोग उत्पन्न होते हैं।इन विजातीय पदार्थों के रक्त में मिलने से बुखार, हृदयरोग एवं चर्मरोग उत्पन्न होते हैं। आँतों में जमाहोने पर कब्ज, गैस, दस्त-पेचिश, बवासीर, भगंदर, हर्निया एवं एपेण्डीसाईटीस को जन्म देते हैं। मस्तिष्क पर उनका प्रभाव पड़ने पर सिरदर्द, अनिद्रा, मिर्गी व पागलपन आदि उत्पन्न होते हैं। गुर्दों में प्रभाव पड़ने से पथरी आदि की सम्भावना बढ़ जाती है। फेफड़ों में उन विजातीय पदार्थों के जमा होने पर सर्दी, खाँसी, दमा, न्यूमोनिया, क्षय एवं कैंसर की सम्भावना रहती है।
मानसिक तनाव, चिंता, क्रोध, दुःख, आवेश, भावुकता तथा अधीरता आदि के कारण हृदय, मस्तिष्क एवं स्नायु के रोग होते हैं।
जीवनी शक्ति दुर्बल होने के मुख्य कारण हैं-
>सामर्थ्य से अधिक शारीरिक तथा मानसिक कार्य करना एवं आवश्यक विश्राम न लेना जीवनीशक्ति का ह्रास करता है।
>रात्रि में काम करना व दिन में सोना जीवनीशक्ति का ह्रास करता है।
>आज दिन भर काम ओर रात को भय, चिंता, क्रोध आदि के कारण शरीर व मन को तनाव में रखना जीवनीशक्ति का ह्रास करता है।
>पौष्टिक आहार का अभाव या आवश्यकता से अधिक खाना। नशीली वस्तुओं एवं गलत आहार का सेवन। रात्रि को देर से भोजन करना व दिन को भोजन करके सोना जीवनीशक्ति का ह्रास करता है।
>उपवास की महत्ता न समझने से भी जीवनी शक्ति का ह्रास होता है। भविष्य में कभी भी किसी प्रकार की पीड़ा का अनुभव करें तो उपवास करें अथवा रसाहार या फलाहार पर रह कर, जीवनी शक्ति को पाचन कार्य में कम व्यस्त रखकर शरीर की शुद्धि तथा मरम्मत के लिए अवसर देंगे तो तुरंत स्वास्थ्य लाभ होगा।
>वीर्यरक्षा (ब्रह्मचर्य) की उपेक्षा करना जीवनीशक्ति का ह्रास करता है।
>विषैली औषधियों, इंजेक्शनों का प्रयोग तथा ऑपरेशन कराना एवं प्रकृति के स्वास्थ्यवर्धक तत्त्वों से अपने को दूर रखना जीवनीशक्ति का ह्रास करता है।
>स्नायु तंत्र की थकान के कारण भी जीवनीशक्ति का ह्रास होता है।
>नकारात्मक विचार हमारी जीवनीशक्ति का ह्रास करते है।
जीवनी शक्ति को बड़ाने के उपाए-: अगर जीवनी शक्ति मजबूत है तो रोग आयेंगे ही नहीं और अगर आयें भी, तो टिकेंगे नहीं।
>जीवनी शक्ति को बड़ाने का निशुल्क व सबसे बढ़िया तरीका योग व प्राणायाम है। इससे जीवनीशक्ति तेजी से बढ़ती है। प्राणायाम करने से मनोबल भी बढ़ता है और बुद्धिबल भी बढ़ता है। बहुत से ऐसे रोग होते हैं जिनमें कसरत करना संभव नहीं होता लेकिन प्राणायाम किये जा सकते हैं।प्राणायाम करने से एक विशेष फायदा यह होता है कि हमारे रोमकूप खुलने लगते हैं। हमारे फेफड़ो में कई हजार रोम छिद्र हैं। उनमें से किसी मनुष्य के 200, किसी के 300 तो किसी-किसी के 500 छिद्र काम करते हैं शेष सब छिद्र बंद पड़े रहते हैं। प्राणायाम से ये बंद छिद्र खुल जाते हैं।जो लोग प्राणायाम नहीं करते उनके ये छिद्र बंद ही पड़े रहते हैं। इससेउनकी प्राणशक्ति कमजोर हो जाती है और उन बंद छिद्रों में जीवाणु उत्पन्न होते हैं। ज्यों ही रोगप्रतिकारक शक्ति कम होती है वे जीवाणु दमा, टीबी आदि बीमारियों का रूप ले लेते है।प्राणायाम से रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है और इस शक्ति से भी कई जीवाणु मर जाते हैं। प्राणायाम करने से विजातीय द्रव्य नष्ट हो जाते हैं और सजातीय द्रव्य बढ़ते हैं। इससे भी कई रोगों से बचाव हो जाता है।
>सूर्य की किरणों में भी रोगप्रतिकारक शक्ति होती है। व जीवनीशक्ति को बढ़ावा मिलता है। सुवह की धुप में 30 मिनट प्रतिदिन टहलना से जीवनीशक्ति भरपूर मात्रा में बनी रहेती है।सूर्य की किरणों में बैठकर 10 मिनट प्राणायाम करें और शवासन में लेट जायें। जहाँ रोग है वहाँ हाथ घुमाकर रोग को मिटाने का संकल्प करें। इससे बड़ा लाभ होता है।
>मंत्रजाप भी जीवनी शक्ति को बढ़ाता है।-: तुलसी के पत्तों का सेवन तथा मंत्रजाप – ये रोगप्रतिकारक शक्ति को बढ़ाते हैं, मन को प्रफुल्लित रखते हैं और बुद्धि को तेजस्वी बनाने में सहायक होते हैं। तथा जीवनीशक्ति को बनाये रखते है।
>A.B.C जूस-: A आमला (Amla), B चकुन्दर (Beet) C गाजर (carrot) का जूस जीवनीशक्ति को मजबूत करता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, आयरन, विटामिन C,A, फास्फोरस, केल्शियम, सभी खनिज तत्व शरीर को मिल जाते है। इस जूस में 1 kg गाजर, 500 ग्राम चकुन्दर, व 250 ग्राम आमला लिया जाता है। यह जूस जीवनीशक्ति को बड़ाने का अच्छा स्रोत्र है।
>संतुलित आहार-: ऐसा आहार जो शरीर को पोषण दे, सभी विटामिन, खनिजो, लवणों, व जरुरी तत्वों की पूर्ति करता हो वो जीवनीशक्ति को बढ़ाता है। सभी अंकुरित अनाज व दाल में पोषक तत्व की मात्रा बढ़ जाती है ओर जीवनी शक्ति को प्रबल करते है।
> जहाँ नकारात्मक विचार हमारी जीवनीशक्ति का ह्रास करते है। वही सकारात्मक विचार हमारी जीवनीशक्ति को प्रबल करते है।
इस प्रकार हम प्राकर्तिक जीवन अपनाकर अपनी जीवनी शक्ति को बढ़ा सकते है।
हमारे शारीर में 12 जगहो पर जीवनीशक्ति का राज्य होता हैं।हर दो घंटे में एक एक अंग मे विशेष प्रभाव होता है।अगर ये बात जानकर फायदा उठाये तो आप भी दीर्घजीवी रहोगे और आपके द्वारा बड़े-बड़े काम हो सकते है। 24 घंटे हमारी जीवनीशक्ति बारह केन्द्रों में 2-2 घंटे विचलन करती है।
1. सुबह 3 से 5 हमारी जीवनीशक्ति फेफड़ो में होती है।उस समय 3 से 5 के अंदर अगर आप प्राणायाम कर लेते है, तो आपकी रोगप्रतिकारक शक्ति, अनुमान शक्ति, शौर्यशक्ति विकसित होगी।जिनको दमे की बीमारी हो, टी. बी. की बीमारी हो उनको तो खासकर इस टाईम में प्राणायम करना चाहिए। जिसके दवाई खा-खाकर लंग्स कमजोर हो गए।वो इस समय का प्रयोग करें,क्योकि इस समय फेफडो की राजसत्ता होती है।
2. सुबह 5 से 7 आपकी जीवनीशक्ति बड़ी आंत में होती है 5 से 7 के बीच आप 2 गिलास गुनगुना पानी पी लिया करे, पानी ज्यादा ठंडा या ज्यादा गरम नहीं होना चहिये। अगर तांबे के बर्तन में रात का रखा पानी पिया जाये तो ओर अधिक लाभ होता है। पानी पीकर थोड़ा टहलना चहिये या एक जगह खड़े होकर दोड़े या जंप-बंप मारे फिर शौच जाये, 7 बजे के बाद शोच जाने की आदत से पेट ख़राब रहेता है।उसके पेट की गड़बड़ी बनी रहती है।ओर कितना भी उपाय इलाज करोगे लेकिन पेट की गड़बड़ी ठीक नहीं होंगी। तो 5 से 7 बजे के बीच बड़े आंत में जीवनीशक्ति होती है। उस समय तक योग, व्यायाम, घुमना आदि निपट ले।
3.7 से 9 जीवनीशक्ति आमाशय में होती है।आमाशय में बड़ी आंत की सफाई करने की ताकत होती है।तथा भोजन, पाचन आदि आसानी से होता है, 7 से 9 के बीच आपको हल्का-फुल्का पेय पदार्थ लेना चहिये, इससे सैंकडों पाचन रोगों से बचाव होगा।
4. 9 से 11 आपकी जीवनीशक्ति प्लीहा अग्नाशय में होती है, इसे जठरा भीकहेते है।उस समय पाचक रस ज्यादा बनता है।पाचन में मदत मिलती है, पाचन ठीक नहीं हुआ तो कच्चा रस बनता है।फिर शरीर मोटा, कमर में दर्द, थकान, आलस्य, अकारण शरीर में कुछ ना कुछ गड़बड़ी होती है।क्योकि 9 से 11 आपकी जीवनीशक्ति प्लीहा अग्नाशय में होती है।उस समय पाचन रस ज्यादा बनने से 9 से 11 के बीच भोजन कर लेना चहिये।डायबीटीज वालो को तो खास उस समय भोजन करना चाहिए और जिनका पाचन कमजोर है, उनको भी भोजन कर लेना चाहिए।कमजोर पाचन को तेज करना हो तो 3-5 खजूर रात को भिगा दे, ओर मसलके दूध में सुबह-सुबह पी ले,7 से 9बजे तक तो आँतो को शक्ति मिलेगी व आँतो का रस भी ज्यादा बनेने लगेगा।पाचन ज्यादा होगा और भोजन के साथ एक ग्लास गुनगुना पानी बीच-बीच में दो-दो घूँट पीते जाये।भोजन के बीच कई बार गर्म पानी पीने से भोजन सुपाच्च्य हो जायेगा।ध्यान रहे9 से 11 के बीच भोजन कर लेना चाहिए और डायबीटीज व कमजोर पाचन वाले को तो जरूर करना चहिये।
5. 11 से 1 में जीवनीशक्ति ह्रदय में रहती है।अगर उससमय भोजन करोगे तो मानवी संवेंद्नाएँ, स्नेह, प्रसन्नता आदि का गला घुट जायेगा। ओर11 से 1 के बीच भोजन करेंगे तो भोजन के रसो में, स्वादों में और भोजन के पाचन में ह्रदय उलझेगा।ह्रदय का विकास रुक जायेगा, आदमी निर्दयी हो जायेगा, स्वार्थी हो जायेगा, तनाव और टेंशनवाला हो जायेगा।इसलिये 11 से 1 के बीच भूलकर भी भोजन नहीं करना चाहिए।11 से 1 ह्रदय के विकास की सत्ता है, ह्रदय विकसित है, इस समय सत्संग, समाजसेवा,सतकर्म, सतभाव, भावग्राही कार्य करने चाहिये।
6. 1 से 3 जीवनीशक्ति छोटे आँत में होती है।उसका मुख्यकार्य है जो भोजन 11 बजे तक खाया गया उससे जो रस बना उससे पोषक तत्वों को अपने अन्दर खींचनावपुरे शरीर को देना।इसलिये अगर1 से 3 में भोजन खाया तो पोषक तत्व कहाँ मिलेंगे।जैसे कच्ची रोटी, कच्चा चावल, कच्ची दाल अच्छा नहीं लगता।ऐसे ही पोषक तत्वों की जगह पर बीमारी करने वाले कच्चे रस होते है, कई बीमारीयां इसी कारण होती है।
7.3 से 5 जीवनी शक्ति मूत्राशय में रहती है।उस समय अधिक पानी पीनेसे पत्थरी की बीमारी नहीं होगी वडायबीटीज की बीमारी जल्दी नहीं होगी और बुढ़ापे में पेशाब सबंधी जो तकलीफे होती है, वो सब नहीं होगी। जिनको भी पथरी है भूलकर भी ऑपरेशन नहीं करवाना चाहिये,चाहे पेशाब की जगह, किडनी की जगह, लीवर की जगह पत्थरी हो, कोई ऑपरेशन की जरूरत नहीं।पथ्थर चटा पौधेके दो-दो पत्ते सुबह-शाम खाये थोड़े दिन में पत्थरी खत्म हो जायेगी।1 से 3 छोटी आंत में 3 से 5 मूत्राशय में जीवनीशक्ति होती हैं।उस समय पानी पी लेना चाहिए और पानी पी के तुरंत बाथरूम नहीं जाना चहिये व बाथरूम जा के तुरंत पानी नहीं पीना चाहिए। कम से कम 10 मिनट का अंतर होना जरूरी है।
8. 5 से 7 जीवनीशक्ति गुर्दे में होती है।शाम का भोजन अगर 5 से 7 के अंदर कर लेते हो तो किडनी औरकान की तकलीफ कभी नहीं होंगी।
9. 7 से 9 के बीच जीवनीशक्ति मष्तिष्क में रहती है।उस समय धार्मिक लोग शास्त्र पढ़े, पाठ, श्लोक, गीता, रामायण, उपनिषद, कंठस्त, आसनी से करेंगे और बच्चों को कम मेहनत में याद रह जायेगा।7 से 9 के बीच स्पेशल ट्यूशन की जरुरत नहीं होती।परिवार वाले उनको थोडा पढ़ा लेंगे हो जायेगा।क्योकि7 से 9 जीवनीशक्ति मस्तक में रहती हैं। इसलियेमस्तक संबंधी काम ईसी समय कर लेना चाहिये।
10.9 से 11 जीवनीशक्ति मेरुरज्जु में रहती है, उस समय की नींद पूर्ण आराम देती है वथकान मिटाती है।
11. 11 से 1 में जीवनीशक्ति पित्ताशय में होती है।पित्त का संचय मानसिक नियंत्रण करता है।अगर 11 से 1के बीच टी.वी. देखा जायेगा तो चिडचिडापन हो जायेगा।पित्त सबंधी रोग होगे।पित्त और वायु मिलके हार्टअटक बनता है, नेत्र सबंधी रोग होंगे, आँख जलेंगे, अधिक मासिक आयेगा, कई बार हो जायेगा, ये सब बीमारी होगी।
12. अगर 1 से 3 के बीच कोई जगता है रात में तो उस समय जीवनीशक्ति लीवर में रहती है।लीवर शरीर का खास अंग है।
1 से 3 जागोगे तो बड़ा घाटा है उस समय शरीर को पूरा विश्राम मिलता है वनिद्रा गहरी होती है। शरीर को नई कौशिका बनाने का अवसर मिलाता है।अगर नई कौशिका नहीं बनी तो शरीर क्षीण होने लगेगा। और अगर इस समय पति-पत्नी का सेक्स हुआ तो जो कौशिका हैं वो भी कम हो जायेगी और बुढापा जल्दी आयेगा।
विशेष-: 11 से 1 जागोगे तो मानसिक विक्षेप हो जाएगा और 1 से 3 पति पत्नी का व्यवहार करना बहूत घाटा है। जैसे आमवस्या, पूर्णिमा को पति-पत्नी का संभोग का काम करनेवाले को विकलांग संतान ही पैदा होगी।अगर गर्भाधान नहीं हुआ तभी भी अमावस्या और पूनम को जीवनीशक्ति का ह्रास ज्यादा होने से कोई न कोई बीमारी पकड लेती है। तो 1 से 3 भूलकर भी संसार व्यवहार नहीं करना चाहिये।
शिवरात्री पर ग्रह-नक्षत्रों का ऐसा योग बनता है की इस समय ऊर्जा चरम पर होती है।इस समय शिवरात्री को अगर आपने उपवास किया है तो हमारी जीवनीशक्ति ऊर्जा और प्राण ऊर्ध्वगामी होते है। शिवरात्री के दिन भगवान शिव का बीज मंत्र ‘ॐ बम बम बम’ अगर सवा लाख जप करते है, तो गठियां की बीमारी से बिस्तर पे पड़ा मरीज एक दिन में दौड़ने लग जायेगा।इसी प्रकार
शिवरात्री की रात ‘ॐकार’ मंत्र का जप बच्चो से कराने सेबच्चे अच्छे बनेंगे, मार्क तो अच्छे लायेंगे साथ ही साथ उनकी मस्तिष्क की क्षमता भी बहूत ऊँची हो जाएगी।इसी प्रकार कुछ विशेष समय पर ऊर्जा का प्रभाव अधिक होता है उस समय पर कोई भी मन्त्र करने से आपकी जीवनी शक्ति बढकर बहुत से चमत्कार कर सकती है।
Kalpant Healing Center
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