Sunday, 4 February 2018

मनुष्य की आवश्यकताऐ

मनुष्य की आवश्यकताऐ
1.मनुष्य की पहली जरूरत है पैसा, अच्छा खाना, अच्छा पहनना और मनुष्य इसके लिए संघर्ष करता हैं। कभी-कभी वह संघर्ष करके भी यह सब नहीं पाता है। उस समय आपको किसी ऐसी पावर की जरूरत होती है जिससे यह जरूरते आपकी ओर आकृर्षित होने लगे। रेंकी में यह सब संभव हो जाता है। आप संबंधों को सुधार सकते हैं। अपनी इच्छाओं को पूरा कर सकते हैं। आप अपनी व परिवार की सुरक्षा कर सकते हैं।

2.प्रेम -:  प्रेम मनोविज्ञानिक व आध्यातमिक दो प्रकार का होता है। और यह प्रेम ही हमें एक दूसरे से बांधकर रखता है। और यही रचनात्मक शक्ति है। स्वयं से व अपने संसार से प्रेम करें, जिससे आप जुड़े हैं। क्योंकि प्रेम में ऊर्जा अधिक क्रियाशील होती है।   इसके विपरीत घृणा विध्वंशक शक्ति है, जो ऊर्जा का नाश करती है। बच्चों में व स्त्रियों में दोनों शक्तियां प्रबल होती हैं। परंतु 16 साल के बाद पुरुष में रचनात्मक शक्ति कम होती जाती है और उसका प्रेम लोभ व लालच बस रहता है।

        प्रेम उपहार देना, सब कुछ स्वीकार कर लेना, एक दूसरे में दोषारोपण करना, मुख्य बातों को, जन्मदिन या पुण्यतिथियो को ध्यान रखना, या अपने उपयोग के लिए दूसरे का प्रयोग करना नहीं है।
        प्रेम दूसरों की गलतियों को सुधारना, दूसरे की महत्ता को महसूस करना, सकारात्मक ऊर्जाओ का आदान प्रदान करना, समस्याओं का मिलकर समाधान करना, हर पल सामने वाले का साथ देना, व हर पल मुस्कराते रहना, व मुस्कराहट बाटने का नाम प्रेम है।

प्रेम से क्या मिलता है ? -:  बहुत कुछ / प्रेम और स्वास्थ के बीच बहुत गहरा संबंध है। यह तनाव को कम करके प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। हमारी आयु बढ़ाने में सहायक है। प्रेममय स्पर्स  से ऑक्सीटॉक्सिन नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो अवसाद (डिप्रेशन) व मनोविकार का उपचार होता है। यह हमारी प्रतिरोध क्षमता को भी बढ़ाता हैं। इसलिए एक दूसरे का आलिंगन, लिपटना, सटकर या चिपटकर लेटना, उठना बैठना, सहलाना आदि क्रियाएं आपके स्वास्थ्य व ह्रदय के लिए अच्छी होती हैं। एक माँ जिन बच्चों को ज्यादा प्यार दुलार करती है वह बच्चा हमेशा ज्यादा हष्ट पुष्ट होता हैं। और जो पति पत्नी ज्यादा प्रेम से रहते हैं उनका स्वास्थ्य अन्य की अपेक्षा ज्यादा ठीक पाया जाता है। एवं उनका जीवन ज्यादा आनंदित होता हैं।

            प्रेम आपस का वो संबंध है जो हमारे आस-पास बना हुआ है चाहे वो मित्र हो, रिश्तेदार हो, या कोई पड़ोसी,सभी के साथ (जिससे भी आप जुड़े.है) आप प्रेम करते हैं या वो आपसे प्रेम करता है तभी हम जचड़ते हैं। और रेंकी के द्वारा हम सभी संबंधों को सुधार सकते हैं, चाहे कोई भी किसी का संबंध क्यों ना हो

3.जब मनुष्य की बेसिक जरूरतें पूरी हो जाती हैं। तो फिर वह सब सुरक्षा चहाता है। वह अंदर से भावनात्मक व आध्यात्मिक सुरक्षा को पाना चाहता है। जो मस्तिष्क को शक्ति प्रदान करती हैं। डर चाहे वह समाज का हो या भीतरी (जैसे अंधेरा, भूत-प्रेत, दुश्मन का डर, चोरी आदि का डर, रोंगो का डर आदि) रेंकी आपके इन डरो से मुक्ति दिलाती है। कुछ लोग डर को स्वीकार ही नहीं करते, पर अंदर से सब डरे हुए हैं। ओर उसी डर को दूर करने के लिए सब मन्दिर मे, गुरूओ के पास, तांत्रिकों के पास, ज्योतिषो के पास, डॉक्टर के पास आदि जगह दौड़ते रहतें हैं। परंतु डर जीवन भर साथ नहीं छोड़ता। हम रेंकी के द्वारा इस डर को दूर कर सकते हैं।

4.अब जब हमारी शारीरीक जरुरते पूरी हो गई,  सुरक्षा भी हो गई। तब आपको जरुरत होती है आत्मविश्वास की, जहाँ पर हमें संतुष्टि प्राप्त होती है। हमारी रचनात्मक बनने की इच्छा होने लगती है। प्रसिद्धि पाना चाहते हैं, लोग मुझे पहचाने, जाने, समाज में इज्जत हो इसका प्रयास करते हैं। और जब यह भी इच्छा पूरी हो जाती है अच्छे बुरे रास्ते पर चलकर, तो आगे की आवश्यकता होती है कि अब मैं अपनी नजर में अच्छा बन जाऊं, सब मुझे अच्छा कहते हैं तो क्या वाकई मे में अच्छा हूँ, इसे ढूंढने लगते हैं, और इस इच्छा के पूरे होने पर आपको शांति आनंद की प्राप्ति होती है। रेंकी आपको यह सब देती है और आनंद के उस मुकाम तक ले जाती है जहां पर आप पूर्ण संतुष्ट व आनंदमय जीवन जीने लगते हैं।

5.फिर अंतिम इच्छा होती है कि मैं दुनिया को बदलू, दुनिया में कुछ ऐसा करू जो मुझे भी आनंद दें और सामने वाले को भी। मैं सेवा करुं, परमात्मा की मस्ती में मस्त रहूँ या और भी ऐसी अंतिम इच्छाऐं जो मनुष्य का लक्ष्य होती है। वो रेंकी से पा सकते सकते हैं।


अब एक सवाल मनुष्य की इतनी सारी इच्छाऐ हैं, शारीरीक जरुरतों से लेकर अंतिम आनंद पाने तक की। बहुत से छोटे छोटे व  बड़े बड़े लक्ष्य है और इन सभी लक्ष्यो का लक्ष्य क्या है। क्या मनुष्य उस लक्ष्य को पा सकता है। मनुष्य की सुबह से लेकर शाम तक की जाने वाली दौड़ और इसी प्रकार जन्म से मृत्यु तक के सफर में की जाने वाली दौड़ केवल और केवल डर से मुक्ति व खुशी को पाना है (Fear, phobia to joy Fulnees, Happiness) तो पूरे जीवन की यात्रा हम डर सें खुशियां पाने तक की करते हैं। रेंकी हमें इस यात्रा को हर क्षण पूर्ण करती रहती है। हर पल हमें खुशियां मिलने लगती हैं हमारी सारी इच्छाऐं पूरी होने लगती हैं।
Kalpant Healing Center
Dr J.P Verma (Swami Jagteswer Anand Ji)
(Md-Acu, BPT, C.Y.Ed, Reiki Grand Master, NDDY & Md Spiritual Healing)
Physiotherapy, Acupressure, Naturopathy, Yoga, Pranayam, Meditation, Reiki, Spiritual & Cosmic Healing, (Treatment & Training Center)
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