सूर्य
नमस्कार :
सूर्य नमस्कार तीन प्रकार से लाभकारी
होता है। पहला धूप स्नान, दूसरा व्यायाम और तीसरा प्रार्थना
द्वारा आत्मशांति होता है। सूर्य नमस्कार सुबह सूर्योंदय के बाद किया जाता है।
गर्मीं के मौसम में सूर्य नमस्कार का समय सुबह 9 बजे तक तथा
सर्दियों के मौसम में सुबह 10 बजे तक होता
है। सूर्य नमस्कार की 6 मुद्राएं होती हैं। इन मुद्राओं से
उपचारात्मक लाभ प्राप्त होता है।
रंगीन बोतल
:
हमारे शरीर में विभिन्न रंगों की कमी
होने पर उस रंग की बोतल पर प्रयोग की जाने वाली रंग की झिल्ली
लपेटकर उपयोग में लाया जा सकता है। बोतल में पीने के लिए पानी अथवा मालिश करने हेतु
तेल को तीन-चौथाई भर देते हैं तथा बाकी बोतल को खाली रखते
हैं। सूर्य के प्रकाश में बोतल को फर्श की बजाय लकड़ी के तख्त आदि पर
रखा जाता है। लकड़ी का रंग भी झिल्ली के रंग के समान रंग लेते हैं और बोतल को
लकड़ी के कार्क के ढक्कन से बंद देते हैं। इस बोतल को सूर्योदय के समय धूप निकलने पर
सूर्य के प्रकाश में रखा जाता है। थोड़ी देर में बोतल के खाली भाग
में ओस की बूंदों के समान बूंदे दिखाई देने पर उस बोतल को अंधेरे
कमरे में रखकर ठंडा कर लिया जाता है। इस जल का उपयोग 2 से 3 दिनों तक किया जा सकता है तथा इस जल को नमी से दूर अंधेरे
कमरे में रखा जाता है। जल के समान ही तेल को भी रंगीन बोतलों में भरकर सिद्ध करके
विभिन्न रोगों में प्रयोग किया जाता है। तेल को सिद्ध करने के लिए रंगीन बोतल में
भरकर सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक लगातार 40 से 45 दिनों तक धूप में रखा जाता है।
चीनी का गाढ़ा घोल बना कर रंगीन बोतलों
में भरकर इसे भी तेल की भांति ही खाने के लिए तैयार कर लिया
जाता है। वायु भी सूर्य के गुणों का समावेश करके उर्जायुक्त की जाती है जिसकी
सहायता से श्वास-संबंधी रोगों को नष्ट किया जाता है। इस प्रकार सूर्य की किरणों के
प्रकाश में तप्त किये हुए जल, तेल, घी और चीनी के घोल से
लगभग सभी प्रकार के रोगों की सफल चिकित्सा की जा सकती है।
Kalpant Healing Center
Dr J.P Verma (Swami Jagteswer
Anand Ji)
(Md-Acu, BPT, C.Y.Ed, Reiki Grand
Master, NDDY & Md Spiritual Healing)
Physiotherapy, Acupressure, Naturopathy, Yoga, Pranayam, Meditation, Reiki, Spiritual & Cosmic Healing, (Treatment & Training Center)
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